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वी विजय कुमार नायडू कल्कि भगवान बनने से पहले जीवन बीमा में क्लर्क थे. वहां भी इनका काम जीवन की सुरक्षा ही था और अब नए रूप में जीवन की सुरक्षा ही है तभी तो उनके भक्त छापे के बाद भी बाबा के लिए ट्विटर पर सपोर्ट लेटर लिख रहे हैं. छापा इसलिए पड़ा क्योंकि बाबा ने रियल इस्टेट और कंस्ट्रक्शन कंपनियों में पैसा लगाया था. अगर आपको अफसोस हो रहा है तो मैं कुछ नहीं कर सकता. 2010 में आंध्र प्रदेश के हाईकोर्ट में इनके खिलाफ कई सारी याचिकाएं दायर हुई थीं. लेकिन इसका नतीजा क्या हुआ पता नहीं. अगर अब भी आपको लगता है कि इस समाज का कुछ हो सकता है तो आप संविधान पढ़ें. आर्टिकल 51-ए के हिसाब से वैज्ञानिक चेतना का प्रसार काम है सरकार और समाज का लेकिन जब बाबा खुद को ही विज्ञान और वैज्ञानिक घोषित कर दें तो इसमें संविधान का क्या कसूर. मैं चाहता हूं कि मंदी के इस दौर में बहुत से ऐसे लोग जो निराश हैं, जिन्हें बहुत दिन हो गए नोटों को देखे हुए ।


